इटकी में कुदरत का कहर: आंधी-तूफान में उड़े घरों के छप्पर, मुर्गी फार्म जमींदोज; फसलों को भारी नुकसान

इटकी में कुदरत का कहर: आंधी-तूफान में उड़े घरों के छप्पर, मुर्गी फार्म जमींदोज; फसलों को भारी नुकसान

Roofs Blown Off Homes in Storm

Roofs Blown Off Homes in Storm, Poultry Farm Razed to the Ground

इटकी। Jharkhand Weather News: रांची जिले के इटकी प्रखंड क्षेत्र में शनिवार को अचानक मौसम के करवट लेने के बाद आई तेज आंधी-तूफान और बेमौसम बारिश ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा में आधा दर्जन से अधिक घरों के छप्पर उड़ गए, जबकि कई कच्चे व एस्बेस्टस के मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं।

अंधड़ के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और लाखों रुपये की संपत्ति के नुकसान का अनुमान है। रुक रुक कर हुई बारिश से लोग घरों में दुबके रहे। सबसे अधिक नुकसान बारीडीह गांव में हुआ है, जहां जमील अंसारी का मुर्गी फार्म हाउस तूफान की चपेट में आकर पूरी तरह जमींदोज हो गया।

इस घटना में उन्हें लाखों रुपये की आर्थिक क्षति हुई है। इसके अलावा बारीडीह के संजू टोप्पो और मलार गांव के सुदीप तिर्की के घरों के छप्पर हवा में उड़ गए। कूर्गी पंचायत की पंचायत समिति सदस्य सुनीता कुजूर और गढ़गांव चचगुरा गांव निवासी कृष्णा गोप के मकान के एस्बेस्टस भी पूरी तरह टूटकर बर्बाद हो गए हैं।

तूफान की तीव्रता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कई गांवों में वर्षों पुराने पेड़ उखड़ गए। शोमे उरांव के घर पर पेड़ गिरने से उनका मकान क्षतिग्रस्त हो गया। वहीं, इटकी गुलाम टोली (रहमत नगर) में इलताफ मंसूरी के घर के आंगन में खड़ा नीम का पेड़ गिर जाने से वहां खड़ी कार दबकर क्षतिग्रस्त हो गई।

कई स्थानों पर बिजली के तारों पर पेड़ों की टहनियां और डालियां गिरने से विद्युत आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है, जिसे बहाल करने का प्रयास किया जा रहा है।

सब्जी की खेती को भारी नुकसान, किसानों में मायूसी

आंधी के बाद रुक-रुक कर हो रही बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में पानी भर जाने से गरमा फसल को भारी क्षति पहुंचने की आशंका है। स्थानीय किसानों ने बताया कि मक्के की फसल को छोड़कर बाकी सभी हरी सब्जियों की फसलें इस बारिश और जलजमाव के कारण पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगी।

प्रगतिशील किसान नंदलाल महतो ने बताया कद्दु, खीरा, गोंगरा, झींगों फ्रेंचबीन, मटर, बैगन टमाटर,सहित सब्जियां बर्बाद हो जाएगी। पीड़ित ग्रामीणों और किसानों ने प्रशासन से सर्वेक्षण कराकर जल्द से जल्द उचित मुआवजा देने की मांग की है।